विजयनगर राज्य
विजयनगर राज्य
यह हिंदू राज्य पांच भाइयों द्वारा मुस्लिम आधिपत्य की प्रतिक्रिया में स्थापित किया गया (१३३६)। इसके प्रथम दो शासक मात्र सरदार कहे जाते रहे, पर धीरे-धीरे यह दक्षिण भारत की प्रधान सत्ता बन गया। इसका घेरा ६० मील था। केवल राजभवन में ३४ गलियां थीं और एक कमरा पूर्णतः हाथीदांत का था। इनकी सेना में १ लाख सैनिक थे। २०० सरदार सूबों का शासन करते थे जिन पर राजा का पूरा नियन्त्रण था। शासन कड़ा था, कर भारी थे, और दंड अकथनीय था।
बुक्का (१३४३-९५) के समय में मुहम्मद शाह I ने विजयनगर पर प्रबल आक्रमण किया और उनका उत्तराधिकारी उसे लेते-लेते बचा। देवराय I (१४०६-१०) के समय में फ़िरोज़ ने रजामंदी को ले लिया और राजा को वार्षिक कर के लिए बाध्य किया। देवराय II (१४२१-४८) के समय में भी अहमदशाह ने उसे परेशान किया वार्षिक कर लेता रहा।
बीजापुर से युद्ध में कृष्ण राय (१५०८-२९) ने उसकी सेना को नष्ट कर दिया (१५२०) जिसमें १६०००० हिन्दू मारे गये। कृष्ण राय ने कुछ दिनों तक बीजापुर पर अधिकार कर लिया। कुलवर्ग (गुलबर्गा) के किले को ढहा दिया। सदाशिव राय के काल में (१५४२-७०) मन्त्री राम राय ने अहमदनगर और गोलकुंडा से मैत्री स्थापित कर बीजापुर की बड़ी हानि की (१५४९)। फिर १५६३ में बीजापुर ने विजयनगर के साथ होकर अहमदनगर पर आक्रमण किया, जबकि राम राय ने भयानक संहार किया। इसके फलस्वरूप बीदर छोड़कर ये सभी बहमनी सुल्तान थे। शेष चारों मुस्लिम राज्य ससैन्य तालिकोट पर चढ़ आए और २३ जनवरी १५६५ को युद्ध हुआ। हिन्दू सेना मुस्लिम से दूनी थी, पर मुस्लिमों के पास तोपें अधिक थीं। १ लाख हिन्दू खेत रहे। विजयनगर का अंत आरंभ हो गया।
१५१० में विजयनगर राज्य के जल सेनाध्यक्ष तिमोजा ने पुर्तगीज गवर्नर अलमीडा को गोवा लेने के लिए उकसाया। अलमीडा ने गोवा ले लिया और तिमोजा पुर्तगाल का परम सच्चा मित्र माना गया। दोनों देशों में मैत्री स्थापित हो गई। कृष्णदेव राय की सेना की ओर से पुर्तगीज भी लड़े (१५१५), जिसके लिए उन्होंने इन्हें सालसिट दे दी (१५१६)। दोनों राज्यों में काफी व्यापार होने लगा। पीछे विजयनगर का यह व्यापार डचों और अंग्रेजों से भी चला। अरबी घोड़े, मखमल, साटन, छींट, रेशम आदि आते थे और सोना रत्न आदि जाते थे। संस्कृत और तेलुगू साहित्य का मान था। कृष्ण राय और राम राय स्वयं विद्वान् थे। बड़े-बड़े भवन, किले, महल और सिंचाई के साधन बने, और कला का उत्थान हुआ।