ऐतिहासिक काल का आरम्भ
ऐतिहासिक काल का आरम्भ
३२६ ई. पू. में सिकन्दर ने खैबर घाटी पार की और फिर सिन्धु को पार किया। सिन्धु पार तक्षशिला के राजा ने उससे सन्धि कर ली और इसलिए वह झेलम के तट पर निर्बाध पहुँचा। उस पार पोरस ५०००० सैनिकों के साथ खड़ी थी, अतः उसने छिपकर १२००० सैनिकों के साथ झेलम पार की। पोरस की सेना का केन्द्र २०० हाथियों की पंक्तियों से बना था, जिसके पीछे ३०००० पैदल थे। केन्द्र के दोनों ओर क्रमशः १५० रथ और २००० घुड़सवार थे। पर सिकन्दर ने घूमकर पोरस के वाम पक्ष पर आक्रमण किया। दक्षिण पक्ष उसकी सहायता को आया और केन्द्र अरक्षित हो गया। वह दूर गया और यूनानी गज-सेना पर तीर और भाले बरसाने लगे। हाथी भगे और अपनी ही सेना को कुचल डाला। भारतीय सेना पराजित हुई। पोरस बन्दी हुआ। पर सिकन्दर ने उसका राज्य लौटा दिया।
वह ब्यास तक जीतता हुआ आगे बढ़ा। उसके सैनिक ब्यास पार करने को तैयार नहीं हुए। अतः सिकन्दर ने १२ बड़ी-बड़ी वेदियाँ बनवाईं और झेलम तक लौट आया। २००० नावें लेकर वह सिन्धु नदी के मार्ग से चला; शेष सेना तट-मार्ग से चली। पत्तल आकर सेना स्थल-मार्ग से सूसा लौटी, और नावें फुरात के मुहाने पर जा पहुंचीं।